अपनी दादी की मृत्यु के बाद 32 वर्षीय साउंड डिज़ाइनर आदित्य रावत उत्तर भारत के पुश्तैनी गाँव देवगढ़ लौटता है। गाँव में रात से जुड़ा एक पुराना नियम है—सूरज डूबने के बाद अगर घर के बाहर से कोई आपका पूरा नाम तीन बार पुकारे तो जवाब नहीं देना। आदित्य इसे अंधविश्वास मानता है, लेकिन पहली ही रात 2:13 बजे courtyard से उसकी मृत माँ की आवाज़ आती है—“आदित्य…” आवाज़ तीन बार उसका नाम लेती है। वह जवाब नहीं देता। सुबह दरवाज़े के बाहर मिट्टी पर एक वाक्य लिखा मिलता है—“तुमने इस बार जवाब क्यों नहीं दिया?” सबसे disturbing बात यह है कि वही वाक्य आदित्य ने बचपन में अपनी माँ से कहा था—उस रात के बाद जब उसका छोटा भाई कबीर हमेशा के लिए गायब हो गया था।
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- अध्याय 1 – किसने मेरा नाम पुकारा?
- अध्याय 2 – तीसरी बार जवाब मत देना
- अध्याय 3 – भैया, मैं कबीर हूँ
- अध्याय 4 – इस घर में उसका नाम मत लेना
- अध्याय 5 – कबीर उस रात बाहर नहीं गया था
- अध्याय 6 – मेरी ही आवाज़ मुझे बुला रही थी
- अध्याय 7 – जिसे तुम नाम देते हो, वह वही बन जाता है
- अध्याय 8 – अगली सुबह खिड़की में कौन था?
- अध्याय 9 – हमने कबीर को दो बार खोया
- अध्याय 10 – उस रात घर से कौन गया था?
- अध्याय 11 – अगर तुम कबीर हो तो ये बात बताओ
- अध्याय 12 – नाम पुकारा
