हिमालय की तलहटी में बसा काल्पनिक गाँव मेघकोट बाहर से किसी postcard जैसा सुंदर था। हरे पहाड़, देवदार के जंगल, पत्थर के पुराने मकान और गाँव के पीछे फैली एक गहरी घाटी। लेकिन सूर्यास्त के बाद मेघकोट बदल जाता था।
यहाँ लोग रात में खिड़कियाँ खुली नहीं रखते थे। घर के बाहर कपड़े नहीं छोड़ते थे। और रात 2:22 बजे के आसपास कोई अपना नाम सुन ले, तो उसे जवाब देने की सख्त मनाही थी। गाँव में इसे कहा जाता था—काली हवाओं की पुकार।
लोककथा के अनुसार बहुत पहले घाटी में मारे गए लोगों की आवाज़ें हवाओं में कैद हो गई थीं। वे हर कुछ वर्षों में लौटती थीं, एक नाम चुनती थीं, और अगली सुबह उस इंसान को अपने साथ ले जाती थीं।
पुलिस records में कहानी कुछ अलग थी। पिछले 26 वर्षों में मेघकोट से सात लोग रहस्यमयी तरीके से गायब हुए थे। हर घटना से पहले ग्रामीणों ने रात में उस व्यक्ति का नाम सुनने का दावा किया। पुलिस ने इसे coincidence, mass suggestion और स्थानीय superstition माना। लेकिन सातों लोग कभी नहीं मिले।
फिर नौ वर्षों तक कोई नाम नहीं पुकारा गया। अब काली हवाएँ वापस आई हैं। और 24 वर्षीय नीरज पंत आठवाँ लापता व्यक्ति बन गया है।
मामले की जांच के लिए एसीपी अहाना शेखावत मेघकोट पहुँचती है। वह स्थानीय अंधविश्वास को मानने से इनकार करती है। लेकिन investigation की पहली रात, 2:22 बजे, हवा फिर चलती है। पहले कोई अस्पष्ट फुसफुसाहट। फिर एक महिला की आवाज़। और आखिर में पूरा गाँव सुनता है—
“अहाना…”
गाँव वाले उससे दूर हट जाते हैं। एक बुज़ुर्ग काँपते हुए कहता है—“अब सुबह तक आप भी नहीं रहेंगी।”
अहाना जवाब देती है—“तो आज रात हम देखेंगे कि हवा मुझे लेने आती है… या कोई इंसान।”
All Chapters
- अध्याय 1 — हवा ने उसका नाम लिया
- अध्याय 2 — काली मिट्टी
- अध्याय 3 — सात गायब लोग
- अध्याय 4 — मृत लड़की की आवाज़
- अध्याय 5 — जंगल में तेरह नाम
- अध्याय 6 — जो कभी गाँव छोड़कर नहीं गए
- अध्याय 7 — घाटी की प्रतिध्वनि
- अध्याय 8 — काली पट्टी के पार
- अध्याय 9 — गोदाम के पीछे
- अध्याय 10 — सत्रह जुलाई दो हजार
- अध्याय 11 — दो हाथ
- अध्याय 12 — हवा को याद था
