शहर से कुछ किलोमीटर दूर…
घने जंगलों के बीच…
एक पुरानी सड़क थी।
दिन में…
वह बिल्कुल सामान्य दिखाई देती थी।
लेकिन…
रात के बाद…
उसका नाम लेने से भी लोग डरते थे।
कहा जाता था…
कि आधी रात के बाद…
दर्जनों गाड़ियाँ उस सड़क से गुजरती हैं।
इंजन की आवाज़ सुनाई देती है…
हेडलाइट्स भी दिखाई देती हैं…
लेकिन…
सुबह होते ही…
सड़क पर एक भी टायर का निशान नहीं मिलता।
न कोई दुर्घटना…
न कोई वाहन…
न कोई रिकॉर्ड।
जैसे…
रात में वहाँ से गुज़रने वाली हर गाड़ी…
हवा में गायब हो जाती हो।
जब खोजी पत्रकार आरव सक्सेना इस रहस्य की जांच शुरू करता है…
तो उसे वर्षों पुराने गुमशुदगी के कई मामलों का संबंध उसी सड़क से मिलता है।
लेकिन…
हर सुराग उसे एक ऐसे सच के करीब ले जाता है…
जिसे छिपाने के लिए कई लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार थे।
अब सवाल था—
क्या वह सड़क सचमुच अभिशप्त थी…
या उसके अंधेरे में सदियों नहीं…
बल्कि वर्षों से चल रहा एक संगठित अपराध छिपा था?
