कुछ राज़ दिन की रोशनी में नहीं…
सिर्फ रात के सन्नाटे में सामने आते हैं।
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी कस्बे देवगढ़ में एक पुरानी हवेली थी, जिसके बारे में लोग वर्षों से एक ही बात कहते आए थे—
“उस घर में रात के 12 बजे के बाद कोई नहीं रुकता।”
कहा जाता था कि 25 साल पहले ठीक आधी रात को उस हवेली में एक ऐसी घटना हुई थी जिसने पूरे परिवार को खत्म कर दिया।
लेकिन उस रात का असली सच कभी सामने नहीं आया।
सालों बाद युवा लेखक अविराज मेहरा अपनी नई किताब के लिए उस हवेली की कहानी खोजने देवगढ़ आता है।
उसे लगता था कि यह सब सिर्फ लोगों की बनाई हुई कहानियाँ हैं।
लेकिन पहली ही रात…
ठीक 12 बजे…
बंद कमरे की घड़ी चलने लगती है।
पुराने फोन पर घंटी बजती है।
और दीवार के पीछे से एक आवाज आती है—
“सच अभी बाकी है।”
धीरे-धीरे अविराज को पता चलता है कि उस हवेली का डर किसी आत्मा से ज्यादा एक छुपे हुए सच से जुड़ा है।
एक पुरानी डायरी…
एक गायब लड़की…
और एक परिवार का ऐसा राज़ जिसे किसी ने 25 साल तक छुपाकर रखा।
अब सवाल था—
आखिर हर रात 12 बजे ही क्यों?
उस रात क्या हुआ था?
और कौन नहीं चाहता कि अविराज उस आखिरी राज़ तक पहुँचे?
