राजस्थान के झालावाड़ के पास स्थित सुरमहल हवेली, जहाँ एक दुर्लभ संगीत संग्रह पीढ़ियों से संभालकर रखा गया था। परिवार के संस्थापक रघुवीर राठौड़ दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड इकट्ठा करने के शौकीन थे। उनकी मृत्यु के बाद संगीत कक्ष हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन हाल ही में हर रात ग्रामोफोन अपने आप चलने लगा। पहले सबने इसे पुरानी मशीन की खराबी समझा। लेकिन एक रिकॉर्ड में परिवार के तीस साल पुराने हत्या कांड की पूरी बातचीत सुनाई देती है। मामले की जांच एसीपी अथर्व चौहान को सौंपी जाती है। उनके साथ ऑडियो फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ईरा सक्सेना और संगीत इतिहास शोधकर्ता अन्वी त्रिपाठी उस धुन के पीछे छिपे सबसे बड़े सच तक पहुँचने निकलते हैं।
