अपनी माँ की मृत्यु के बाद 32 वर्षीय architectural photographer आरव शर्मा अपनी पत्नी नंदिनी के साथ भोपाल के बाहर स्थित पुश्तैनी घर लौटता है। घर की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा पच्चीस वर्षों से बंद है और उसकी इकलौती खिड़की ईंटों से चुनवा दी गई है। बचपन से आरव को केवल एक नियम याद है—“उस खिड़की को कभी मत खोलना।” पहली रात ठीक 2:26 बजे उसे ईंटों के पीछे से तीन बार काँच पर दस्तक सुनाई देती है। समस्या यह है कि वहाँ अब काँच होना ही नहीं चाहिए। अगली सुबह दीवार की अंदरूनी तरफ एक छोटी हथेली का निशान दिखाई देता है और धूल में लिखा मिलता है—“आरव, मैंने खिड़की बंद नहीं की थी।”
All Chapters
- अध्याय 1 – उस दीवार के पीछे खिड़की है
- अध्याय 2 – रात 2:26 की दस्तक
- अध्याय 3 – आरव, मैंने खिड़की नहीं खोली थी
- अध्याय 4 – तस्वीर में वह लड़की कौन है?
- अध्याय 5 – इस घर में कोई तारा नहीं रहती थी
- अध्याय 6 – खिड़की बाहर से बंद नहीं हुई थी
- अध्याय 7 – उस रात कौन हमें देख रहा था?
- अध्याय 8 – माँ ने पूरी खिड़की क्यों चुनवा दी?
- अध्याय 9 – तारा उस रात मरी नहीं थी
- अध्याय 10 – मुझे गलत तरफ का दृश्य याद है
- अध्याय 11 – खिड़की के बाहर कौन था?
- अध्याय 12 – बंद खिड़की
