1974 में 19 वर्षीय Steve Jobs एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु की तलाश में भारत आया जिसका नाम था नीम करोली बाबा। लेकिन कैंची धाम पहुँचकर उसे पता चला कि बाबा लगभग एक वर्ष पहले ही शरीर छोड़ चुके थे। हजारों किलोमीटर की यात्रा के बाद Steve उस इंसान से नहीं मिल सका जिसे खोजते हुए वह भारत आया था। फिर भी कैंची धाम, भारत में बिताया समय और बाबा से जुड़े लोगों की स्मृतियाँ उसके सामने एक नया सवाल रखती हैं—क्या किसी गुरु से सीखने के लिए उससे मिलना जरूरी है, या कभी-कभी एक अधूरी मुलाकात भी पूरी जिंदगी की खोज को नई दिशा दे सकती है?
All Chapters
- अध्याय 1 – मैं भारत क्यों जा रहा हूँ?
- अध्याय 2 – जिस बाबा को मैं खोज रहा हूँ
- अध्याय 3 – कैंची धाम का रास्ता
- अध्याय 4 – तुम एक साल देर से आए हो
- अध्याय 5 – नीम करोली बाबा से अधूरी मुलाकात
- अध्याय 6 – जवाब कहाँ है?
- अध्याय 7 – पहले ये बर्तन उठा दो
- अध्याय 8 – कम चीज़ें, ज्यादा स्पष्टता
- अध्याय 9 – Intellect और Intuition
- अध्याय 10 – मैं यहाँ क्या लेने आया था?
- अध्याय 11 – भारत से लौटने वाला Steve
- अध्याय 12 – जिस मुलाकात की जरूरत नहीं पड़ी
