मुंबई की देश की सबसे बड़ी टेक कंपनी Zenith Global Systems, जहाँ हज़ारों कर्मचारी हर दिन भविष्य की तकनीक बनाते थे। लेकिन कंपनी के 48वें फ्लोर का बोर्डरूम पिछले पाँच वर्षों से रात में सील रहता था। फिर भी हर सुबह कुर्सियाँ बदली हुई मिलतीं, गिलासों में ताज़ा पानी होता और व्हाइटबोर्ड पर नई मीटिंग के नोट्स लिखे होते।
जब तीन वरिष्ठ अधिकारी लगातार गायब हो जाते हैं, तो जांच की जिम्मेदारी मिलती है एसीपी आर्यमान चौधरी को। उनके साथ डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ ईरा सक्सेना और कॉर्पोरेट ऑडिटर युवान मेहरा इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं। लेकिन जितनी गहराई में वे जाते हैं, उतना ही स्पष्ट होता है कि यह सिर्फ़ एक मीटिंग नहीं, बल्कि करोड़ों के कॉर्पोरेट अपराध का गुप्त न्यायालय था।
All Chapters
- अध्याय 1 – बंद बोर्डरूम
- अध्याय 2 – रात की मीटिंग
- अध्याय 3 – खाली कुर्सियाँ
- अध्याय 4 – पहला गायब अधिकारी
- अध्याय 5 – सीसीटीवी का सच
- अध्याय 6 – गुप्त ऑडिट
- अध्याय 7 – झूठे दस्तावेज़
- अध्याय 8 – बोर्ड का षड्यंत्र
- अध्याय 9 – अंतिम एजेंडा
- अध्याय 10 – चेयरमैन की पहचान
- अध्याय 11 – कॉर्पोरेट नरसंहार
- अध्याय 12 – खामोश मीटिंग
