पिता की मृत्यु को…
सिर्फ़ दस दिन हुए थे।
परिवार अभी…
उनके जाने के दुख से…
उबर भी नहीं पाया था।
तभी…
बैंक से फोन आया।
उनके नाम पर…
एक पुराना लॉकर था…
जिसकी जानकारी…
परिवार में किसी को नहीं थी।
लॉकर खुला…
तो उसमें…
न सोना था…
न नकदी।
सिर्फ़…
एक पुरानी कंपनी की मुहर…
कुछ शेयर प्रमाणपत्र…
एक काली डायरी…
और…
एक ऐसे आदमी की तस्वीर थी…
जिसे परिवार में…
किसी ने पहले कभी नहीं देखा था।
लेकिन…
हर दस्तावेज़ पर…
उसी आदमी का नाम लिखा था—
विहान ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के मालिक—शिवांश कौशल।
जबकि…
डायरी के आख़िरी पन्ने पर…
पिता की लिखावट में लिखा था—
“कारोबार मेरा था… लेकिन नाम उसका। अगर यह सच बाहर आया, तो हमारे बच्चों की पूरी विरासत छिन जाएगी।”
All Chapters
- अध्याय 1 – अनजान लॉकर
- अध्याय 2 – दूसरे नाम का कारोबार
- अध्याय 3 – काली डायरी
- अध्याय 4 – रहस्यमयी दावेदार
- अध्याय 5 – विरासत पर रोक
- अध्याय 6 – बंद फैक्टरी
- अध्याय 7 – गायब साझेदार
- अध्याय 8 – परिवार के भीतर गद्दार
- अध्याय 9 – असली हिस्सेदार
- अध्याय 10 – पिता का अपराध
- अध्याय 11 – गुप्त कारोबार का सच
- अध्याय 12 – विरासत का आख़िरी फैसला
