कुछ गहने सिर्फ सजावट नहीं होते…
उनमें किसी की यादें, वादे और अधूरी कहानियाँ कैद होती हैं।
राजस्थान के छोटे से गाँव चंद्रगढ़ में रहने वाली नंदिनी राठौड़ अपनी शादी के बाद नए सपनों के साथ अपने ससुराल आई थी।
लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही उसे पुराने घर की परंपराओं और एक अजीब रहस्य का एहसास होने लगा।
घर की बुजुर्ग औरतें हमेशा उसे एक बात कहती थीं—
“इन सोने के कंगनों को कभी खुद से अलग मत करना।”
नंदिनी को लगता था कि यह बस एक पुरानी मान्यता है।
लेकिन एक रात जब वह घर छोड़कर जाने का फैसला करती है, उसके हाथों में पहने वही कंगन अचानक उसे एक पुराने सच की तरफ ले जाते हैं।
एक बंद कमरा…
पुराने खत…
और एक ऐसी स्त्री की कहानी, जिसकी आवाज़ वर्षों पहले इसी हवेली में दबा दी गई थी।
धीरे-धीरे नंदिनी को पता चलता है कि इन कंगनों से जुड़ा रिश्ता केवल उसका नहीं है।
पीढ़ियों से इस परिवार की हर बहू एक अधूरी कहानी लेकर जीती आई है।
क्या नंदिनी इस पुराने राज़ को सामने ला पाएगी?
या वह भी उसी खामोशी का हिस्सा बन जाएगी जिसे लोग परंपरा कहते आए हैं?
All Chapters
- अध्याय १ – कंगनों की सौगात
- अध्याय २ – हवेली की खामोशी
- अध्याय ३ – पुराने खतों की आवाज़
- अध्याय ४: पीढ़ियों की अधूरी कहानियाँ
- अध्याय ५ – नंदिनी का संदेह और संकल्प
- अध्याय ६ – पीढ़ियों का छुपा दर्द
- अध्याय ७ – वीर प्रताप का साथ
- अध्याय ८ – परंपरा और सच के बीच संघर्ष
- अध्याय ९: कंगनों का अंतिम खुलासा
- अध्याय १० – नंदिनी की पहचान और मुक्ति
