सोने के कंगन का राज़

सोने के कंगन का राज़
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कुछ गहने सिर्फ सजावट नहीं होते…
उनमें किसी की यादें, वादे और अधूरी कहानियाँ कैद होती हैं।

राजस्थान के छोटे से गाँव चंद्रगढ़ में रहने वाली नंदिनी राठौड़ अपनी शादी के बाद नए सपनों के साथ अपने ससुराल आई थी।
लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही उसे पुराने घर की परंपराओं और एक अजीब रहस्य का एहसास होने लगा।

घर की बुजुर्ग औरतें हमेशा उसे एक बात कहती थीं—
“इन सोने के कंगनों को कभी खुद से अलग मत करना।”
नंदिनी को लगता था कि यह बस एक पुरानी मान्यता है।
लेकिन एक रात जब वह घर छोड़कर जाने का फैसला करती है, उसके हाथों में पहने वही कंगन अचानक उसे एक पुराने सच की तरफ ले जाते हैं।

एक बंद कमरा…
पुराने खत…
और एक ऐसी स्त्री की कहानी, जिसकी आवाज़ वर्षों पहले इसी हवेली में दबा दी गई थी।
धीरे-धीरे नंदिनी को पता चलता है कि इन कंगनों से जुड़ा रिश्ता केवल उसका नहीं है।
पीढ़ियों से इस परिवार की हर बहू एक अधूरी कहानी लेकर जीती आई है।

क्या नंदिनी इस पुराने राज़ को सामने ला पाएगी?
या वह भी उसी खामोशी का हिस्सा बन जाएगी जिसे लोग परंपरा कहते आए हैं?

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