मृतकों की दास्तान

मृतकों की दास्तान
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काल्पनिक पहाड़ी कस्बे निशानगढ़ से बाहर स्थित है— रायकोठी हवेली। लगभग 190 वर्ष पुरानी। कभी यह स्थानीय राजपरिवार का सांस्कृतिक केंद्र थी। संगीत। कविता। किस्सागोई। रात्रि-सभाएँ। और एक प्रसिद्ध परंपरा— रात्रि-दास्तान। कहा जाता है कि हवेली का अंतिम दरबारी कथावाचक मीर सादिक़ ऐसी कहानियाँ सुनाता था जिनमें वह वास्तविक लोगों के रहस्य छिपा देता था। एक रात उसने राजपरिवार की सबसे बड़ी सच्चाई कहानी में सुना दी। सुबह… वह गायब था। उसका शव कभी नहीं मिला। इसके बाद हवेली बंद कर दी गई। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं— उसकी आवाज़ बंद नहीं हुई। हर कुछ वर्षों में… कोई रायकोठी में रात बिताता है। ठीक 12:33 बजे… उसे एक दास्तान सुनाई देती है। और फिर उसका जीवन बदल जाता है। पिछले 50 वर्षों में पुलिस records में ऐसे 14 लोग मिले हैं जिन्होंने दावा किया— “मेरे साथ वही होने लगा जो कहानी में था।” उनमें से पाँच गायब हुए। तीन मानसिक रूप से टूट गए। चार ने अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ दी। और दो… आज भी जीवित हैं। लेकिन दोनों कहते हैं— “हम वह व्यक्ति नहीं हैं जो उस रात हवेली में गया था।” अब अन्वीरा अपने भाई अर्णव की आख़िरी location के कारण रायकोठी पहुँची है। लेकिन पहली दास्तान सुनने के बाद… उसे समझ आता है— अर्णव शायद हवेली का पहला शिकार नहीं था। और संभव है… वह आख़िरी भी न हो।

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