सुनीता… एक छोटे गाँव की वो लड़की, जिसकी आँखों में शहर की चमक और दिल में अनगिनत सपने थे।
वो चाहती थी कि अपनी मेहनत से परिवार को वो सुख दे, जो बचपन में कभी नहीं मिला।
लेकिन दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस की लंबी शामें, घर की जिम्मेदारियाँ, पति की मुस्कान और बेटी की मासूमियत के बीच उसकी खुद की वो गहरी, दबी हुई चाहत जागने लगी थी।
कभी-कभी रात को अकेले लेटे हुए, जब पति की साँसें नियमित हो जातीं, तो उसकी उँगलियाँ खुद-ब-खुद उसकी मुलायम त्वचा पर सरकतीं… वो गर्माहट, वो सिहरन, जो दिन भर की थकान को भुला देती।
ऑफिस में बॉस की नजरें जब उसकी कमर पर ठहरतीं, तो दिल की धड़कनें तेज हो जातीं।
क्या वो करियर की सीढ़ियाँ चढ़ते-चढ़ते अपनी वो आग बुझा पाएगी?
क्या राजेश को कभी पता चलेगा कि उसकी पत्नी के मन में कितनी उथल-पुथल है?
क्या अनन्या बड़ी होकर समझ पाएगी कि माँ के बलिदान के पीछे कितनी छिपी हुई तड़प थी?
हर अध्याय में एक नया मोड़…
एक नई चाहत, एक नया राज, और वो सस्पेंस कि अगले पन्ने पर क्या होगा।
संघर्ष, प्यार, बलिदान और वो गुप्त रोमांस जो हर कामकाजी भारतीय औरत अपने दिल में दबाकर रखती है।
कभी-कभी एक गर्म साँस, कभी एक छिपी हुई छुअन, कभी वो पल जब शरीर कहता है – “बस थोड़ा और…”
ये कहानी सिर्फ सुनीता की नहीं…
ये उन लाखों औरतों की है जो सपनों के लिए सब कुछ देती हैं, लेकिन अपनी चाहतों को कभी पूरी तरह नहीं जी पातीं।
पढ़ते-पढ़ते तुम्हें लगेगा… ये मेरी कहानी तो है!
