राजस्थान की धरती पर बसा एक ऐसा गाँव जिसकी कहानी सुनकर आज की आधुनिक दुनिया भी हैरान रह जाती है।
देवमाली — एक ऐसा गाँव जहाँ आज भी लोगों के घरों में ताले नहीं लगते।
जहाँ चोरी का डर नहीं।
जहाँ जमीन किसी इंसान की नहीं बल्कि भगवान के नाम मानी जाती है।
जहाँ रिश्ते पैसों से नहीं, भरोसे से चलते हैं।
लेकिन बदलते समय के साथ इस गाँव की सबसे बड़ी परीक्षा शुरू होती है।
शहर में पढ़ा-लिखा युवा आरव, कई वर्षों बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटता है। उसके लिए विकास का मतलब बड़ी इमारतें, पैसा और आधुनिक सुविधाएँ हैं।
लेकिन गाँव वालों के लिए विकास का मतलब है — ईमान, विश्वास और साथ रहना।
आरव शुरुआत में इन परंपराओं को अंधविश्वास समझता है।
पर धीरे-धीरे उसे पुराने मंदिरों, दीवारों पर बने चित्रों, बुजुर्गों की कहानियों और पूर्वजों के दिए एक वचन के पीछे छिपा ऐसा सच पता चलता है जो उसकी सोच बदल देता है।
इसी बीच एक बड़ी कंपनी गाँव की जमीन खरीदने आती है और गाँव वालों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है—
क्या कुछ करोड़ रुपयों के लिए सदियों पुरानी आस्था टूट जाएगी?
या देवमाली साबित करेगा कि सतयुग केवल किताबों में नहीं, लोगों के कर्मों में भी जिंदा रहता है?
