काल्पनिक महानगर विराजपुर में देश के उद्योगपति, वरिष्ठ वकील, कलाकार, निवेशक, मीडिया मालिक और प्रभावशाली परिवारों के सदस्य एक ऐसे क्लब से जुड़े थे जिसके बारे में आम लोगों ने कभी नहीं सुना था।
उसका नाम था—
The Echelon Room
सदस्यता पैसा देकर नहीं मिलती थी।
किसी मौजूदा सदस्य को…
आपके लिए…
अपनी प्रतिष्ठा दाँव पर लगानी पड़ती थी।
क्लब में प्रवेश के पहले दिन…
कोई दस्तावेज़ साइन नहीं कराया जाता।
एक वरिष्ठ सदस्य केवल इतना कहता—
“यहाँ अनुबंध कागज़ पर नहीं होता।
यहाँ आपका मौन ही हस्ताक्षर है।”
युवा कॉर्पोरेट अधिवक्ता आरुष्मान देव को क्लब में प्रवेश उसके वरिष्ठ साझेदार की सिफारिश पर मिलता है।
पहली रात…
उसे सब कुछ सामान्य लगता है।
महँगी शराब नहीं, बल्कि संयमित बातचीत।
कोई मोबाइल फोन नहीं।
कोई कैमरा नहीं।
कोई नाम लेकर परिचय नहीं।
लेकिन…
वह एक बंद गलियारे में…
एक प्रभावशाली सदस्य को भयभीत युवा कर्मचारी से माफी माँगने की बजाय उसे चुप रहने के लिए मजबूर करते देखता है।
आरुष्मान नियम तोड़ता है।
अगले दिन…
वह उस कर्मचारी से संपर्क करता है।
उसी रात…
वह क्लब जाता है।
और…
सुबह उठने पर…
उसे पिछली रात का कुछ याद नहीं।
फोन में कोई डेटा नहीं।
उसकी कार पूरे समय घर पर दिखाई देती है।
लेकिन…
उसकी शर्ट की जेब में…
क्लब का एक काला टोकन पड़ा है।
उस पर केवल लिखा है—
“1 NIGHT.”
कुछ दिनों बाद…
दूसरी रात उसकी स्मृति से गायब होती है।
फिर तीसरी।
और…
जब क्लब की एक महिला सदस्य सायेशा मिर्ज़ा अचानक लापता हो जाती है…
आरुष्मान को समझ आता है—
यह क्लब अपने रहस्य नहीं बचा रहा।
वह…
अपने सदस्यों की वास्तविकता नियंत्रित कर रहा है।
मामले में धीरे-धीरे प्रवेश करती हैं डीसीपी अन्वेशा कोचर, डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. समायरा घोष और सामाजिक मनोवैज्ञानिक डॉ. युगांक सेन।
लेकिन समस्या यह है—
क्लब के खिलाफ गवाही देने वाला…
हर व्यक्ति…
कुछ दिनों बाद…
अपनी ही गवाही से मुकर जाता है।
All Chapters
- अध्याय 1 – क्लब में पहली रात
- अध्याय 2 – मौन पहला नियम
- अध्याय 3 – गायब हुई रात
- अध्याय 4 – शर्म की कीमत
- अध्याय 5 – दूसरा उल्लंघन
- अध्याय 6 – सदस्य जो कभी था ही नहीं
- अध्याय 7 – प्रतिष्ठा समिति
- अध्याय 8 – सायेशा की आख़िरी रात
- अध्याय 9 – सात गायब रातें
- अध्याय 10 – द कस्टोडियन
- अध्याय 11 – अनुबंध किसने लिखा?
- अध्याय 12 – खामोश अनुबंध
