Singhania Global के arrogant और ruthless CEO विराज सिंघानिया की दुनिया deadlines, profits और control पर चलती है। उसकी company में उससे बहस करने की हिम्मत किसी में नहीं—जब तक नई brand strategist नायरा शर्मा उसकी meeting में सबके सामने उसे गलत नहीं कह देती। दोनों की professional rivalry धीरे-धीरे attraction में बदलने लगती है, लेकिन नायरा नहीं जानती कि उसके परिवार को वर्षों पहले बर्बाद करने वाले एक corporate decision पर वही नाम लिखा था जिससे वह प्यार करने लगी है—विराज सिंघानिया।
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- अध्याय 1 – ये खड़ूस कौन है?
- अध्याय 2 – छह हफ्ते, मिस शर्मा
- अध्याय 3 – आप हमेशा इतने rude रहते हैं?
- अध्याय 4 – शायद आप उतने बुरे नहीं हैं
- अध्याय 5 – मुझे तुम्हारी आदत हो रही है
- अध्याय 6 – CEO नहीं, सिर्फ विराज
- अध्याय 7 – अगर मैं चली जाऊँ तो?
- अध्याय 8 – मुझे तुमसे प्यार नहीं होना चाहिए था
- अध्याय 9 – इस file पर तुम्हारे sign हैं
- अध्याय 10 – मेरे परिवार को किसने बर्बाद किया?
- अध्याय 11 – सच सिर्फ तुम्हारा या मेरा नहीं था
- अध्याय 12 – Mr. Impossible
