कुछ रिश्ते अधूरे नहीं होते, बस टूटकर बिखर जाते हैं। वियाना आज भी उस आखिरी शाम को याद करती है जब ताविष का हाथ उसके हाथ से छूट गया था। शादी के मात्र तीन साल बाद एक गलतफहमी, परिवार की दखल और घावों भरी चुप्पी ने उनके बीच दीवार खड़ी कर दी। दोनों ने एक-दूसरे को दोष दिया, दोनों ने चोट खाई और दोनों ने बिना एक शब्द कहे अलग हो गए।
सात साल बीत गए। वियाना अब एक सफल इंटीरियर डिजाइनर है, दिल्ली में अपनी छोटी सी दुनिया में खुद को संभाले हुए। वह हंसती है, काम करती है, दोस्तों के साथ वक्त बिताती है, लेकिन रातों में अकेलेपन के साए में पुरानी यादें अभी भी दस्तक दे जाती हैं। ताविष मुंबई में एक नामी आर्किटेक्ट बन चुका है। बाहरी दुनिया उसे सफल और संतुलित मानती है, पर अंदर से वह खुद को कभी माफ नहीं कर पाया।
जिंदगी ने दोनों को अलग-अलग रास्तों पर ले जाकर सिखाया कि प्यार सिर्फ एहसास नहीं, बल्कि विश्वास और समझ की परीक्षा भी है। अब जब परिस्थितियां उन्हें अनायास फिर आमने-सामने लाकर खड़ा करती हैं, तो पुराने घाव फिर से खुलने लगते हैं। क्या इस बार वे एक-दूसरे को समझ पाएंगे? या फिर पछतावे की इस लंबी यात्रा में उन्हें कोई और रास्ता मिल जाएगा?
क्या जिंदगी वाकई प्यार को दूसरा मौका देती है, या यह सिर्फ एक और दर्दनाक विदाई का बहाना भर है? पहला अध्याय शुरू होते ही यह सवाल आपके दिल में गूंजने लगेगा।
