Billionaire’s Arranged Wife – कॉन्ट्रैक्ट से मोहब्बत तक

Billionaire’s Arranged Wife – कॉन्ट्रैक्ट से मोहब्बत तक
Text size
👁 6,377 views

यह पूरी तरह काल्पनिक हिंदी उपन्यास है। केन्द्र में एक arranged marriage है, एक विवाह-अनुबंध है, और दो लोग हैं जो एक ही छत के नीचे अजनबी से धीरे-धीरे अपने बनते हैं। प्रेम है, वैवाहिक निकटता है, चुप्पी है, परिवार के रहस्य हैं।

कियारा सहगल स्वतंत्र इंटीरियर आर्किटेक्ट है। बांद्रा के छोटे अटेलियर के नाम पर उसका अपना बोर्ड है। वह शर्तों से डरती नहीं, सजावट बनना अस्वीकार करती है, और परिवार की डूबती साँसों के बीच भी अपनी भाषा बचाना चाहती है।

रुद्रांश वर्धन वर्धन समूह के अरबपति सीईओ हैं। नियंत्रण उनकी भाषा है, चुप्पी उनकी आदत है, और घर उनके लिए कंपनी से अलग कमरा है जिसे वे वर्षों से केवल रिपोर्ट से चलाते रहे। ठंडे पति की छवि उनके कंधे पर है। उसके नीचे एक थका हुआ आदमी भी है।

शैलेन्द्र सहगल कियारा के पिता हैं। सहगल मटेरियल्स उनके कंधे पर है, ऋण उनके दराज में है, और बेटी की हाँ उनके डर में बीमा बन जाती है।

अद्विका सहगल कियारा की माँ हैं। घर की प्रार्थनाएँ उन्हीं के चुप कप में बैठती हैं। वे बेटी को ना कहने की अनुमति देती हैं, लेकिन मन से हाँ माँगती हैं।

अन्वय सहगल कियारा का छोटा भाई है। फाइलें वही खोलता है जिन्हें घर बंद रखना चाहता है।

निराली कियारा की सबसे करीबी सहेली है। कागज़ वही पढ़ती है, सच वही कटघरे में लाती है, और डूबने से पहले किनारा याद दिलाती है।

श्रेयसी नायर अटेलियर में कियारा की साथी है। काम की दुनिया में वही पीछे नहीं रहती, और नाम प्लेट वही नहीं बदलने देती।

तृषा वर्धन रुद्रांश की बहन है। घर और बहू के बीच पुल वही बनती है—कभी चेतावनी लेकर, कभी हँसी लेकर।

ईशवर्धन रुद्रांश का भाई है। मज़ाक में तीर छुपाता है, और सच को भाई वाली भाषा में नहीं, ईमानदार भाषा में कहने की कोशिश करता है।

मानसी वर्धन रुद्रांश की माँ हैं। रीतियाँ उनके घर में अनुशासन से चलती हैं। बेटे के अधूरे अखबार को वही घटना मानती हैं।

धनराज वर्धन परिवार के वरिष्ठ हैं। घर की इच्छा और विवाह का दबाव अक्सर उन्हीं की कुर्सी से आता है।

वियान खन्ना अनुबंध लिखने वाले वकील हैं। कागज़ की भाषा उन्हीं के दफ्तर से घर में प्रवेश करती है।

फराह मिर्ज़ा ऑरेलियस क्वे से जुड़ी पेशेवर हैं। काम की दुनिया में कियारा को पत्नी से पहले वास्तुकार की तरह देखने वाली दुर्लभ नज़र उन्हीं के पास है।

वेदिका राय रुद्रांश की पुरानी संबंधिनी हैं। दुश्मन नहीं, नक्शा लेकर आने वाली औरत। उनकी एक पंक्ति घर में देर तक बैठती है—जब वह प्रेम करता है, तब भी सामने वाले को पता नहीं चलता।

आदित्य सेन कियारा का पुराना सहपाठी है। गैलरी वाली शाम पर छत की बात करता है, जलन नहीं—केवल एक पुरानी हँसी।

रामू काका वर्धन घर के पुराने नौकर हैं। कॉफी, सूप और घर की छोटी सच्चाइयाँ अक्सर उन्हीं की रसोई से निकलती हैं।

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top