सन्नाटे की चाहत

सन्नाटे की चाहत
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मध्यप्रदेश के घने जंगलों के बीच स्थित सन्नाटापुर गाँव सालों से दुनिया से कटा हुआ था। गाँव में सूरज ढलते ही हर दरवाज़ा बंद हो जाता। बुज़ुर्ग बच्चों को एक ही बात सिखाते—
“अगर रात में कोई तुम्हारा नाम लेकर बुलाए… तो पीछे मत देखना…”


लेकिन युवा लेखक आर्यमान शुक्ला इन कहानियों को अंधविश्वास समझता था। वह एक किताब लिखने के लिए गाँव पहुँचता है। पहली ही रात 3:03 बजे उसे वही आवाज़ सुनाई देती है—
“आर्यमान… मुझे चाहो…”
और उसी क्षण उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है।

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