भोपाल के सेंट माइकल कब्रिस्तान में…
पिछले छह महीनों से…
हर शुक्रवार रात…
एक जैसी घटना हो रही थी।
रात में…
दस्तक की आवाज़…
सुबह…
एक नया नाम…
और…
फिर…
एक नई मौत।
पुलिस…
इसे अंधविश्वास मानकर टालती रही।
लेकिन…
जब…
एक मंत्री का नाम…
उसी लिफाफे में मिला…
तो पूरा मामला…
क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
जांच की जिम्मेदारी…
एसीपी दक्ष प्रताप को मिली।
उनके साथ…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. वामिका सहगल और…
खोजी पत्रकार ईशिता मलिक जुड़ते हैं।
जांच आगे बढ़ते ही…
तीनों को एहसास होता है…
कि…
जिस व्यक्ति की कब्र से दस्तक आ रही है…
वह शायद…
कभी मरा ही नहीं था।
