गुरुग्राम की एक साइबर सुरक्षा कंपनी में काम करने वाला निशांत वेद अपने काम और अकेली दिनचर्या में उलझा हुआ था।
एक रात…
उसके मोबाइल पर एक ऐसा चैट इंटरफेस खुला…
जो किसी भी इंस्टॉल ऐप का हिस्सा नहीं था।
पहले संदेश में…
अगले दिन होने वाली एक लूट का सटीक समय, स्थान और तरीका लिखा था।
निशांत ने उसे स्पैम समझकर अनदेखा कर दिया।
लेकिन जब घटना बिल्कुल उसी तरह हुई…
तो वह डर गया।
उसने चैट का स्क्रीनशॉट लेने की कोशिश की…
मगर हर बार स्क्रीन काली हो जाती।
उसने मोबाइल बंद किया…
लेकिन संदेश फिर भी आता रहा।
मामला साइबर क्राइम अधिकारी डीसीपी समायरा कोहली तक पहुँचा।
जांच में पता चला…
कि यही चैट शहर के सात और लोगों के मोबाइल पर भी दिखाई दी थी।
हर व्यक्ति को अलग अपराध की जानकारी मिली थी।
लेकिन…
किसी को भी अपराध रोकने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।
मानो…
चैट अपराधों की भविष्यवाणी नहीं कर रही थी…
बल्कि…
उनका प्रसारण कर रही थी।
