काल्पनिक महानगर मृणालपुर में रहने वाली 32 वर्षीय इरा सेन एक fragrance archivist है। उसका काम दुर्लभ perfumes, पारंपरिक attars और historical scent formulations का documentation करना है।
इरा मानती है कि खुशबू और स्मृति के बीच संबंध असाधारण है। किसी पुराने perfume की एक बूंद… वर्षों पुरानी जगह… किसी व्यक्ति… या किसी भूली भावना को अचानक वापस ला सकती है।
लेकिन वह इसे हमेशा neuroscience और sensory association के रूप में समझती रही है। तब तक… जब तक एक estate auction से उसके पास एक रहस्यमयी perfume bottle नहीं आती।
काले काँच की बोतल। चाँदी का ढक्कन। कोई निर्माता नहीं। केवल नीचे खुदे तीन अक्षर— M-17
बोतल खोलते ही… इरा को ऐसी memory flashes महसूस होती हैं जो उसके अपने जीवन से मेल नहीं खातीं। एक लाल साड़ी। बारिश में खड़ी पुरानी कार। एक अधूरा प्रेम-पत्र। एक व्यक्ति की उंगलियों का स्पर्श और… एक ऐसा चेहरा… जिसे वह अगले दिन पहली बार वास्तविक दुनिया में देखती है।
वह व्यक्ति है प्रसिद्ध architect रुद्रेन मलिक। रुद्रेन बताता है कि perfume उसकी दिवंगत पत्नी माहिका के निजी collection का हिस्सा था। माहिका तीन वर्ष पहले संदिग्ध दुर्घटना में मरी थी। उसकी मृत्यु के बाद… उसके निजी journals, photographs और scent archive रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे।
अब वही perfume इरा तक कैसे पहुँचा? और… इरा को माहिका जैसी memories क्यों महसूस हो रही हैं?
रहस्य तब और गहरा होता है जब दूसरे लोग भी perfume सूंघने के बाद अलग-अलग “यादें” बताने लगते हैं। एक व्यक्ति माहिका के प्रेम को याद करता है। दूसरा उसके डर को। तीसरा… उसकी मृत्यु की रात को।
और हर व्यक्ति… रुद्रेन के प्रति अलग भावना विकसित करता है। प्रेम। घृणा। आकर्षण। डर।
मामले में प्रवेश करती हैं एसीपी तवेशा मित्तल, olfactory neuroscientist डॉ. ज़रीन मुखर्जी और privacy-forensics विशेषज्ञ डॉ. नव्यांश राव। लेकिन investigation का सबसे खतरनाक प्रश्न यह नहीं—
“बोतल में क्या है?”
बल्कि— “किसने तय किया कि माहिका की निजी यादें उसकी मृत्यु के बाद दूसरों की संपत्ति बन सकती हैं?”
All Chapters
- अध्याय 1 – काली बोतल
- अध्याय 2 – मेरी नहीं थी वह याद
- अध्याय 3 – मृत स्त्री का प्रेम
- अध्याय 4 – खुशबू में छिपा चेहरा
- अध्याय 5 – मैं तुम्हें क्यों चाहती हूँ?
- अध्याय 6 – माहिका की दूसरी कहानी
- अध्याय 7 – चुराया हुआ निजी जीवन
- अध्याय 8 – M-17
- अध्याय 9 – किसकी याद किसकी है?
- अध्याय 10 – स्मृतियों का बाज़ार
- अध्याय 11 – आख़िरी खुशबू
- अध्याय 12 – स्मृति की बोतल
