गुप्त गवाह

गुप्त गवाह
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लखनऊ के प्रतिष्ठित कारोबारी परिवारों में रस्तोगी परिवार का नाम सम्मान से लिया जाता था। परिवार के मुखिया विराज रस्तोगी ने छोटे कपड़ा कारोबार को करोड़ों की कंपनी में बदल दिया था। लेकिन… उनकी सफलता के पीछे एक ऐसा अतीत था… जिसके बारे में परिवार में बात करना भी मना था। बीस वर्ष पहले… रस्तोगी परिवार के पुराने ड्राइवर माधव केशरी पर कंपनी से बड़ी रकम चुराने और एक कर्मचारी की हत्या करने का आरोप लगा था। पुलिस से भागते समय… उसकी कार नदी में गिर गई। कार मिली। कुछ सामान मिला। लेकिन… शव कभी नहीं मिला। माधव को मृत मान लिया गया। केस बंद हो गया। अब… बीस वर्ष बाद… विराज अपने ही बंगले से गिरकर मर जाता है। परिवार इसे आत्महत्या बताता है। लेकिन पोस्टमॉर्टम की शुरुआती विसंगतियाँ और रहस्यमयी रिकॉर्डिंग मामला बदल देती हैं। जांच की जिम्मेदारी एसीपी तृषा वर्मा को मिलती है। उनके साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. युवांश कुलश्रेष्ठ और व्यवहार विश्लेषक अद्वैत सेन जांच शुरू करते हैं। लेकिन… जैसे-जैसे पुलिस परिवार के नौ सदस्यों से पूछताछ करती है… एक अजीब बात सामने आती है। हर व्यक्ति… हत्या के बारे में झूठ नहीं बोल रहा। लेकिन… हर व्यक्ति… उस रात की कोई न कोई बात जरूर छिपा रहा है। और कहीं… इसी बंगले में… वह व्यक्ति भी मौजूद था… जिसे बीस साल से… मृत समझा जा रहा था।

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