खून का महल

खून का महल
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काल्पनिक राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा क्षेत्र में स्थित रक्तगढ़ महल का निर्माण 1774 में राजा अभयराज रुद्रसेन ने करवाया था। कभी यह राजघराने की शक्ति का प्रतीक था। लेकिन 1842 में महल के पश्चिमी हिस्से में हुई एक रहस्यमयी घटना के बाद राजपरिवार ने उसे छोड़ दिया। पुराने सरकारी दस्तावेज़ों में लिखा है— “संरचनात्मक असुरक्षा के कारण परित्यक्त।” स्थानीय लोककथा कुछ और कहती है। उस रात महल में 23 लोग गायब हुए थे। कोई शव नहीं मिला। केवल दीवारों पर 23 मानव आकृतियाँ दिखाई दीं। समय के साथ वे आकृतियाँ पत्थर में दब गईं। फिर हर कुछ वर्षों में कोई व्यक्ति महल में प्रवेश करता… और गायब हो जाता। आज तक आधिकारिक रूप से 18 आधुनिक missing-person cases महल से जुड़े हैं। उनमें से एक— रूहानी की बड़ी बहन वेदिका। चौदह वर्ष पहले 24 वर्षीय वेदिका अपने दोस्तों के साथ महल देखने गई थी। बाकी तीन लोग लौट आए। वेदिका नहीं। उन्होंने दावा किया— वेदिका अचानक एक corridor से गायब हो गई। लेकिन रूहानी ने वर्षों तक उस कहानी पर विश्वास नहीं किया। अब राज्य सरकार महल के restoration और heritage conversion की योजना बना रही है। रूहानी को lead structural consultant नियुक्त किया गया है। उसे नहीं बताया गया था— उसकी नियुक्ति किसी संयोग का परिणाम नहीं। महल के पिछले मालिक की वसीयत में… उसका नाम पहले से लिखा था। और एक sealed पत्र में केवल एक वाक्य— “जिसकी बहन दीवार में है… वही आख़िरी दरवाज़ा खोल सकेगी।”

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