मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में स्थित अमरबाग हवेली… जहाँ पीढ़ियों पुराना एक विशाल बगीचा था। बगीचे के बीच एक गोल हिस्सा हमेशा काली मिट्टी से ढका रहता। परिवार का नियम था—
“उस मिट्टी को कभी मत खोदना…”
कोई कारण कभी नहीं बताया गया।
पच्चीस वर्ष पहले उसी बगीचे में आठ वर्षीय आर्या रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। परिवार ने उसे अपहरण मानकर मामला बंद कर दिया।
लेकिन अब परिवार के मुखिया विक्रमदेव चौहान की मृत्यु के बाद हर रात मिट्टी एक नया नाम बनाने लगी। जब मिट्टी में परिवार के सबसे बड़े उत्तराधिकारी ईशान चौहान का नाम उभरता है, तो अगले दिन उसे बचपन की एक अधूरी घटना याद आने लगती है।
कुछ दिनों बाद बगीचे से एक पुराना लकड़ी का संदूक मिलता है। उसमें बच्चों के खिलौने, एक छोटी डायरी और ऐसे सबूत होते हैं जो पूरे परिवार की विरासत बदल सकते हैं।
मामले की जांच एसीपी अद्वैत राठौड़ को सौंपी जाती है। उनके साथ फॉरेंसिक भू-विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. ईरा व्यास और बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. नंदिता सेन उस काली मिट्टी और खोई हुई मासूमियत का सच खोजने निकलते हैं।
