जयपुर में रहने वाला अनिरुद्ध सहगल, 38 वर्ष, एक सफल वित्तीय सलाहकार था। पत्नी तृषा, बारह वर्षीय बेटी आहना और वृद्ध माँ वसुधा सहगल के साथ उसकी जिंदगी सामान्य दिखाई देती थी। कम से कम… बाहर से।
एक सोमवार सुबह अनिरुद्ध घर से निकला… और वापस नहीं आया। न कोई ransom call। न बैंक खाते से पैसा निकला। न फोन आया। न कोई दुर्घटना दर्ज हुई।
रेलवे स्टेशन की CCTV footage में अनिरुद्ध 8:02 बजे मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाता दिखाई देता है। उसके बाद… वह किसी कैमरे में नहीं दिखता।
मामला एसीपी रिद्धिमा तोमर को सौंपा जाता है। शुरुआत में उन्हें लगता है—यह सामान्य missing-person case है। लेकिन अनिरुद्ध के घर की जांच में… उन्हें एक पुराना लोहे का बॉक्स मिलता है। उसमें—एक दूसरे नाम का कॉलेज पहचान पत्र… चौदह साल पुरानी अखबार की clipping… एक जली हुई तस्वीर… और… समर अवस्थी नाम के व्यक्ति का death certificate मिलता है।
Death certificate पर लगी तस्वीर… अनिरुद्ध की थी।
तृषा कहती है—उसने अपने पति को कभी समर नाम से नहीं जाना। लेकिन कहानी का दूसरा झटका तब आता है… जब पुलिस अनिरुद्ध के आधिकारिक रिकॉर्ड जांचती है। जिस स्कूल में वह पढ़ने का दावा करता था… वहाँ उसका कोई रिकॉर्ड नहीं। जिस कॉलेज की degree उसने दिखाई थी… वहाँ enrollment number किसी दूसरे व्यक्ति का था। और जिस शहर में उसने अपना बचपन बिताने की बात कही थी… वहाँ कोई उसे पहचानता ही नहीं।
अब पुलिस किसी लापता आदमी को नहीं खोज रही थी। पुलिस… एक ऐसे व्यक्ति का अतीत खोज रही थी… जो शायद… चौदह वर्षों से… किसी और की जिंदगी जी रहा था।
All Chapters
- अध्याय 1 — सुबह जो वापस नहीं आई
- अध्याय 2 — स्टेशन से गायब आदमी
- अध्याय 3 — यह आदमी चौदह साल पहले मर चुका है
- अध्याय 4 — झूठी जिंदगी
- अध्याय 5 — लोहे का बॉक्स
- अध्याय 6 — समर अवस्थी
- अध्याय 7 — पत्नी जिसे कुछ पता नहीं था
- अध्याय 8 — मृत आदमी का फोन
- अध्याय 9 — असली नाम
- अध्याय 10 — उसने खुद को लापता किया
- अध्याय 11 — चौदह साल पुराना सच
- अध्याय 12 — लापता
