अपनी माँ की मृत्यु के बाद 34 वर्षीय documentary filmmaker अर्जुन राठौर पत्नी मीरा के साथ भोपाल से पुश्तैनी कस्बे देवगढ़ लौट रहा है। रात 11:47 बजे भारी बारिश में GPS अचानक highway छोड़कर 17 किलोमीटर का सुनसान shortcut दिखाता है—वह रास्ता जो सरकारी नक्शे में 22 साल से बंद है। कुछ किलोमीटर बाद सड़क किनारे लगभग दस साल का भीगा हुआ लड़का खड़ा मिलता है। वह कार में बैठने से पहले केवल एक सवाल पूछता है—“आप देवगढ़ जा रहे हैं?” पीछे बैठकर कहता है—“मुझे उस मोड़ से पहले उतार देना जहाँ नीली बस गिरी थी।” अर्जुन rear-view mirror में उसे देखकर ठंडा पड़ जाता है। वही लड़का उसकी माँ के पुराने album की photograph में उसके साथ खड़ा है। पीछे लिखा है—“अर्जुन और कबीर — 2004।” अर्जुन को कबीर नाम का कोई बच्चा याद नहीं।
All Chapters
- अध्याय 1 – वो सुनसान रास्ता
- अध्याय 2 – सड़क किनारे खड़ा बच्चा
- अध्याय 3 – इस बार भी मुझे भूल गए?
- अध्याय 4 – नीली बस कहाँ गिरी थी?
- अध्याय 5 – मैं भी उस बस में था
- अध्याय 6 – रात 12:17 का हादसा
- अध्याय 7 – मैंने कबीर का हाथ छोड़ दिया था
- अध्याय 8 – उस रात रास्ता दो हिस्सों में टूट गया
- अध्याय 9 – कबीर हादसे में नहीं मरा था
- अध्याय 10 – माँ ने मुझसे सच क्यों छिपाया?
- अध्याय 11 – तुम वापस आए थे
- अध्याय 12 – रास्ता अभी खत्म नहीं हुआ
