अपनी दादी सावित्री की मृत्यु के बाद 36 वर्षीय forensic pathologist डॉ. आदित्य राणा पत्नी नंदिनी और सात वर्षीय बेटी इरा के साथ लगभग बीस साल बाद अपने पुश्तैनी घर लौटता है। परिवार में दशकों से एक डरावना विश्वास है—किसी व्यक्ति की वस्तु पर अधूरे काले वृत्त और बीच की रेखा वाला निशान दिखाई दे जाए तो सात दिनों के भीतर उसकी मृत्यु हो जाती है। आदित्य इसे अंधविश्वास मानता है, जबकि उसके परिवार की चार पुरानी मौतों से पहले वही symbol मिलने का दावा किया जाता रहा है। लेकिन पहली रात उसे दादी की diary में लिखा मिलता है—“निशानी मौत को बुलाती नहीं है। हम उसका मतलब गलत समझते रहे।” उसी रात bathroom mirror पर वही निशान उसकी सात वर्षीय बेटी इरा के नाम के पास उभरता है। अगली सुबह दीवार पर केवल दो शब्द लिखे हैं—“सात दिन।”
All Chapters
- अध्याय 1 – मौत की निशानी
- अध्याय 2 – इरा के नाम के ऊपर निशान
- अध्याय 3 – सात दिन
- अध्याय 4 – इस निशान के बाद चार लोग मरे थे
- अध्याय 5 – तस्वीरें झूठ बोल रही थीं
- अध्याय 6 – हर मौत से पहले वे उसी जगह गए थे
- अध्याय 7 – दादी निशानी से डरती नहीं थीं
- अध्याय 8 – यह मौत का नहीं, खतरे का निशान था
- अध्याय 9 – पाँचवीं मौत किसकी थी?
- अध्याय 10 – छठी नहीं होने देना
- अध्याय 11 – सातवाँ दिन
- अध्याय 12 – आख़िरी निशानी
