भोपाल की प्रसिद्ध लेखिका नैना अरोड़ा की रहस्यमयी मौत को पच्चीस साल बीत चुके थे।
पुलिस ने उसे आत्महत्या घोषित कर केस बंद कर दिया था।
लेकिन…
उसकी पोती अनिका अरोड़ा को घर की लाइब्रेरी से उसकी पुरानी डायरी मिली।
डायरी के सभी पन्नों में अधूरी कहानियाँ, निजी विचार और रहस्यमयी संकेत लिखे थे।
सिर्फ़ आख़िरी पन्ना खाली था।
उस रात…
बारिश के बीच…
अनिका ने डायरी अपने कमरे में रखी।
सुबह जब उसकी नींद खुली…
तो खाली पन्ने पर सिर्फ़ एक वाक्य लिखा था—
“जिसने मुझे मारा… वह आज भी इसी घर में है।”
यहीं से शुरू होती है एक ऐसी जांच…
जहाँ हर नया पन्ना…
एक नया अपराध उजागर करता है।
