प्यार या बदला?

प्यार या बदला?
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क्या कोई इंसान इतनी गहराई से किसी के दिल में उतर सकता है कि हर सांस उसके नाम हो जाए, या फिर वह सिर्फ एक सुनियोजित खेल खेल रहा हो जिसका अंत पहले ही तय है?

कव्या, एक सफल और स्वतंत्र व्यवसायी, अपनी जिंदगी को पूरी तरह से नियंत्रित करती थी। अतीत के कुछ जख्मों को वहने के बावजूद वह मुस्कुराकर आगे बढ़ती रही थी। फिर एक दिन रेयांश आया—आकर्षक, रहस्यमयी और उसकी हर कमजोरी को समझने वाला। उसकी नजरों में कव्या को वो प्यार दिखता जो उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। रेयांश की हर बात, हर स्पर्श और हर बलिदान कव्या को यह विश्वास दिलाता कि यह प्यार उसकी किस्मत का सबसे सुंदर तोहफा है।

पर धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातें सवाल खड़े करने लगीं। रेयांश के अतीत का एक अंधेरा कोना, उसकी आँखों में कभी-कभी झलकता गुस्सा और कुछ ऐसे संकेत जो बताते थे कि वह कव्या से पहले भी मिल चुका है—शायद किसी और रूप में। क्या वह सच में उससे प्यार करता है या फिर सालों पुराने विश्वासघात का बदला लेने आया है?

जैसे-जैसे दोनों के रिश्ते गहरे होते गए, कव्या के मन में प्यार और शक के बीच का संघर्ष तेज होता गया। एक तरफ रेयांश की वो मासूमियत, दूसरी तरफ उसके अतीत के छिपे राज।

अब सवाल यह है—अगर यह बदला है तो रेयांश का असली चेहरा क्या होगा? और अगर यह प्यार है तो फिर वह पुराना जख्म किसका है?

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