अपनी माँ शालिनी की मृत्यु के बाद 35 वर्षीय documentary photographer अभय कपूर पत्नी रिया के साथ लगभग छब्बीस साल बाद अपनी पुश्तैनी कोठी लौटता है। Dining room में आठ लोगों की table के साथ नौ कुर्सियाँ हैं, लेकिन आख़िरी कुर्सी पर किसी को बैठने नहीं दिया जाता। परिवार उसे केवल “खाली कुर्सी” कहता है। पहली रात 2:46 बजे अभय कुर्सी घिसटने की आवाज़ सुनकर नीचे पहुँचता है। कुर्सी table से बाहर निकली है, उसके सामने एक extra plate रखी है और table पर बच्चों जैसी handwriting में लिखा है—“आज भी मेरी जगह खाली है?” अगले दिन 1999 की एक photograph में अभय अपने पीछे नौ वर्षीय एक लड़के को देखता है। Photograph के पीछे लिखा है—“अभय और नील — दोनों को साथ बैठाना।” अभय को नील नाम के किसी बच्चे की कोई याद नहीं।
All Chapters
- अध्याय 1 – वो खाली कुर्सी
- अध्याय 2 – आज भी मेरी जगह खाली है?
- अध्याय 3 – तस्वीर में मेरे पीछे कौन है?
- अध्याय 4 – नील कौन था?
- अध्याय 5 – इस कुर्सी के नीचे हमारे नाम हैं
- अध्याय 6 – रात 2:46 पर कौन खोया था?
- अध्याय 7 – मैं उसे स्टेशन पर छोड़कर नहीं आया था
- अध्याय 8 – वह गलत ट्रेन में चढ़ गया था
- अध्याय 9 – नील उस रात मरा नहीं था
- अध्याय 10 – माँ जानती थीं कि वह जिंदा है
- अध्याय 11 – मेरी जगह अभी भी खाली है?
- अध्याय 12 – अब कोई कुर्सी खाली नहीं थी
