अपनी माँ देवयानी राठौड़ की मृत्यु के बाद 36 वर्षीय architectural photographer आर्यन राठौड़ 27 साल से बंद अपनी पुश्तैनी हवेली बेचने राजस्थान के छोटे से गाँव देवगढ़ लौटता है। परिवार ने हवेली उस रात के बाद हमेशा के लिए बंद कर दी थी जिस रात एक आठ वर्षीय बच्ची कथित रूप से गायब हुई थी। आर्यन को ऐसी किसी बच्ची की याद नहीं। लेकिन माँ द्वारा छोड़ी गई एक चौथी चाबी पर “कमरा 17” लिखा है, जबकि हवेली के नक्शे में केवल 16 कमरे हैं। पहली रात 2:17 बजे ऊपरी मंज़िल से एक बच्ची की आवाज़ उसे पुकारती है—“आर्यन भैया… इस बार मुझे अंदर मत छोड़ना।” अगले दिन धूल से ढकी family photograph में आर्यन अपने बगल में एक छोटी बच्ची को देखता है। Photograph के पीछे केवल एक नाम लिखा है—“आर्यन और तारा — हवेली बंद होने से तीन दिन पहले।”
All Chapters
- अध्याय 1 – वो बंद हवेली
- अध्याय 2 – आर्यन भैया, दरवाज़ा खोलो
- अध्याय 3 – इस हवेली में सत्रहवाँ कमरा नहीं है
- अध्याय 4 – तारा कौन थी?
- अध्याय 5 – दीवार के पीछे एक कमरा है
- अध्याय 6 – रात 2:17 पर कौन गायब हुआ था?
- अध्याय 7 – माँ ने दरवाज़ा बंद कराया था
- अध्याय 8 – कमरे के पीछे दूसरा रास्ता था
- अध्याय 9 – तारा उस रात मरी नहीं थी
- अध्याय 10 – माँ उससे वर्षों पहले मिल चुकी थीं
- अध्याय 11 – मैंने हवेली नहीं चुनी थी
- अध्याय 12 – हवेली फिर खुल गई
