वाराणसी के घाटों पर बचपन से साथ खेलने वाले दो बच्चे समय के साथ एक-दूसरे की दुनिया बन जाते हैं। ईशव्रत एक शांत, प्रतिभाशाली लेकिन भीतर से बेहद अकेला लड़का है, जबकि ज़ोया उसकी मुस्कान की वजह।
ईशव्रत के लिए यह सिर्फ़ प्यार नहीं था—वह ज़ोया के बिना अपनी पहचान की कल्पना भी नहीं कर सकता था। लेकिन ज़िंदगी की राहें बदलती हैं। ज़ोया अपने सपनों के साथ आगे बढ़ जाती है, जबकि ईशव्रत अतीत में ही कैद रह जाता है।
सालों बाद वह अकेलेपन से बचने के लिए डेटिंग ऐप्स का सहारा लेता है। हर नई लड़की में उसे ज़ोया दिखाई देती है। वह किसी को नुकसान पहुँचाने के इरादे से शुरुआत नहीं करता, लेकिन उसका जुनून, असुरक्षा और टूटा हुआ मन धीरे-धीरे उसे वास्तविकता से दूर ले जाने लगता है।
उसका फ्लैट बिल्कुल सामान्य दिखाई देता है—साफ-सुथरा ड्रॉइंग रूम, धीमी रोशनी, चाय की खुशबू, पुराना फ्रिज और हमेशा चेहरे पर एक शांत मुस्कान। लेकिन इस सन्नाटे के पीछे कई अनसुलझे रहस्य छिपे हैं।
एक दिन एक ऐसी युवती उससे मिलने आती है जो बाकी सबसे अलग साबित होती है। उसे धीरे-धीरे एहसास होने लगता है कि इस घर में कुछ बहुत गलत है। वहीं दूसरी ओर शहर में वर्षों से गायब होती युवतियों की जाँच एक पुराने अनसुलझे केस से जुड़ने लगती है।
क्या ईशव्रत सचमुच वही है जैसा दिखाई देता है?
या उसके अतीत में ऐसा कौन-सा सच दफ़्न है जिसने उसके प्रेम को विनाशकारी जुनून में बदल दिया?
All Chapters
- अध्याय 1: घाटों की अनकही दोस्ती
- अध्याय 2: ज़ोया का प्रस्थान
- अध्याय 3: अकेलेपन का डिजिटल साथी
- अध्याय 4: पहली छाया
- अध्याय 5: फ्लैट का सन्नाटा
- अध्याय 6: पुराने फ्रिज का राज
- अध्याय 7: गायब युवतियों की गुत्थी
- अध्याय 8: इंस्पेक्टर अभय राठौर की जांच
- अध्याय 9: फ्लैशबैक — सच्चाई के टुकड़े
- अध्याय 10: नई आगंतुक — मेघा
- अध्याय 11: मन के अंधेरे कोने
- अध्याय 12: ज़ोया कौन थी?
