क्या प्यार कभी हक बन जाता है? क्या मोहब्बत इंसान को तोड़ने का हथियार बन सकती है?
आरुषि — २७ वर्षीय, सुंदर, महत्वाकांक्षी और जिंदादिल लड़की। दिल्ली में एक अच्छी जॉब, सपनों से भरी आँखें और शादी के बाद एक नया जीवन शुरू करने की उम्मीद। लेकिन शादी के सिर्फ़ छह महीने बाद उसकी सारी उम्मीदें चूर-चूर हो गईं।
उसका पति विक्रम — बाहर से परफेक्ट, अंदर से खतरनाक। वो आरुषि के हर सपने, हर अरमान और हर खुशी का कातिल बन गया। चाहे वो उसकी जॉब हो, उसकी दोस्ती हो, या उसकी मुस्कान — विक्रम सब कुछ कुचलना चाहता था।
“तुम मेरी हो आरुषि। सिर्फ़ मेरी। तुम्हें किसी और की ज़रूरत नहीं — न जॉब की, न दोस्तों की, न सपनों की।”
आरुषि हर दिन टूटती जा रही थी। लेकिन उसके अंदर एक आग भी जल रही थी — आजादी की, खुद को पाने की, और उस इंसान से बदला लेने की, जिसने उसके अरमानों को मार डाला।
एक तरफ विक्रम का खतरनाक प्यार, दूसरी तरफ आरुषि की दबी हुई ताकत। क्या आरुषि इस जाल से निकल पाएगी? या फिर वो खुद इस बेपनाह लेकिन जहरीले इश्क़ में खो जाएगी?
एक ऐसा इमोशनल, डार्क और इंटेंस लव स्टोरी, जिसमें प्यार, दर्द, बदला और ताकत का गहरा मिश्रण है।
