पिता की मृत्यु के बाद 35 वर्षीय forensic acoustic analyst विराज सक्सेना पत्नी अनन्या के साथ 21 साल बाद अपने पुश्तैनी घर लौटता है। यही वह घर है जहाँ उसकी बुआ रागिनी की रहस्यमय मृत्यु हुई थी। परिवार के अनुसार रात 1:26 बजे रागिनी की चीख़ उनके bedroom से सुनाई दी और कुछ देर बाद वह वहीं मृत मिलीं। घटना को accidental death मानकर case बंद कर दिया गया। लेकिन वापसी की पहली रात विराज उसी कमरे की पश्चिमी दीवार के अंदर से एक महिला की चीख़ सुनता है। अगले दिन दीवार में छिपा पुराना ventilation channel मिलने पर उसे शक होता है कि 21 साल पहले सुनी गई चीख़ bedroom से आई ही नहीं थी। अगर आवाज़ किसी दूसरे कमरे से आई थी, तो रागिनी के साथ उस रात वास्तव में क्या हुआ था—और परिवार ने गलत कमरे को दो दशक तक सच क्यों माना?
All Chapters
- अध्याय 1 – दीवारों ने चीख़ सुनी
- अध्याय 2 – चीख़ यहाँ से नहीं आई थी
- अध्याय 3 – दीवार के अंदर एक रास्ता है
- अध्याय 4 – रात 1:26 पर क्या हुआ था?
- अध्याय 5 – बुआ की आवाज़ दूसरे कमरे से आई थी
- अध्याय 6 – उस रात घर में पाँच लोग थे
- अध्याय 7 – हम सब गलत कमरे की तरफ भागे थे
- अध्याय 8 – चीख़ संगीत वाले कमरे से आई थी
- अध्याय 9 – नरेश वहाँ क्या कर रहा था?
- अध्याय 10 – बुआ की मौत हादसा नहीं थी
- अध्याय 11 – गलत सुर से डरना मत
- अध्याय 12 – दीवारों ने फिर सुना
