अंधेरे का कुआँ

अंधेरे का कुआँ
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काल्पनिक गाँव भैरवपुर कभी आसपास के क्षेत्र में अपने पुराने पत्थर के मंदिरों, विशाल बावड़ियों और जंगलों के लिए जाना जाता था। लेकिन गाँव की सीमा से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थित एक जगह से लोग आज भी दूरी रखते थे। खंडहर हो चुकी रतनगढ़ कोठी। और उसके पीछे—एक विशाल पत्थर का कुआँ। उसकी गहराई का कोई निश्चित सरकारी record नहीं था। उसके पानी का रंग वर्षों से असामान्य रूप से गहरा था। गाँव वाले उसे कहते थे—अंधेरे का कुआँ। पिछले पचास वर्षों में उस कुएँ से जुड़े कम से कम बारह विचित्र मामले गाँव की कहानियों में मौजूद थे। कुछ लोगों ने दावा किया—उन्होंने पानी में अपनी मृत्यु देखी। कुछ महीनों या वर्षों बाद उनकी मृत्यु वैसी परिस्थितियों से मिलती-जुलती हुई। लेकिन इससे भी रहस्यमयी थे—पानी निकालने वाले लोग। पुरानी लोककथा कहती थी— “कुआँ पहले तुम्हारी परछाई पीता है… फिर तुम्हारी आवाज़… फिर तुम्हारी याद… और आखिर में तुम्हें।” पुलिस ने ऐसी कहानियों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन records में पाँच लोग ऐसे थे जो कुएँ के आसपास जाने के बाद वास्तव में लापता हुए थे। उनमें से एक था—विराज वैद्य। 27 साल पहले। इशानी तब केवल दो वर्ष की थी। उसकी माँ ने उसे बताया था कि विराज परिवार छोड़कर चला गया। दादी ने कहा—वह कुएँ का शिकार हुआ। और police file… कहती थी कि उसके गायब होने के पीछे foul play की संभावना थी। अब… इशानी अपने पिता की मृत्यु नहीं… बल्कि उसे जीवित पानी में देख चुकी है। उसी रात एक दूसरी घटना होती है। गाँव का 31 वर्षीय युवक शौर्य परमार दोस्तों के सामने अंधविश्वास का मजाक उड़ाते हुए कुएँ से एक बाल्टी पानी निकालता है। अगली सुबह… उसकी माँ family photograph देखती है। तस्वीर में सब लोग मौजूद हैं। लेकिन… जहाँ शौर्य खड़ा था… वहाँ केवल एक धुंधली आकृति है। शौर्य स्वयं घर में मौजूद है। वह तस्वीर देखकर हँस देता है। लेकिन तीन दिन बाद… उसका Aadhaar photocopy, school photograph और पुराना wedding video देखते समय परिवार को एक और अजीब बात पता चलती है—हर जगह… उसका चेहरा… धीरे-धीरे अस्पष्ट होता जा रहा है। और सातवीं सुबह… शौर्य का कमरा खाली मिलता है। उसकी माँ चीखते हुए कहती है— “मेरा बेटा कहाँ है?” लेकिन… घर में मौजूद उसकी छोटी बहन पूछती है— “कौन-सा बेटा?”

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