अनकही विरासत

अनकही विरासत
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एक शांत और साधारण दिखने वाला घर बाहर से बिल्कुल सामान्य लगता है।

पिता विनोद (55), माँ सविता (50), बेटा अमित (28) और बेटी रीना (25)—चार लोगों का यह परिवार वर्षों से एक ही छत के नीचे रहते हुए भी कई अनकही बातों और अधूरी चुप्पियों के साथ जी रहा है।

घर की दीवारें पुरानी हैं, मगर उनमें सिर्फ़ यादें नहीं, कुछ ऐसे सच भी छिपे हैं जिन्हें कभी बाहर नहीं आना चाहिए था।

एक दिन अटारी में रखा पुराना संदूक खुलता है।
उसमें कुछ पुराने खत, दस्तावेज़ और एक ऐसा नाम मिलता है जो इस परिवार का हिस्सा कभी था ही नहीं।

धीरे-धीरे बच्चों को शक होने लगता है कि उनके दादा की विरासत में कोई बड़ा धोखा छिपा था।

माँ की आँखों में डर है।
पिता की चुप्पी में बोझ है।
और हर दस्तावेज़ परिवार की नींव को थोड़ा और कमजोर कर देता है।

क्या विरासत केवल जमीन और हवेली होती है?
या कभी-कभी विरासत वह सच भी होती है जिसे छिपाकर रखा गया हो?

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