काल्पनिक राजस्थान-मध्यप्रदेश सीमा क्षेत्र में स्थित छोटा कस्बा कालसिंहपुर कभी एक समृद्ध रियासत हुआ करता था।
शहर से पाँच किलोमीटर बाहर पहाड़ी पर खड़ी है—
रुद्रप्रताप हवेली।
लगभग 280 वर्ष पुरानी।
हवेली का सबसे बड़ा कमरा था—
न्याय दरबार।
कहा जाता है कि राजा वीरभान रुद्रप्रताप लोगों के मामलों की सुनवाई वहीं करता था।
लेकिन उसके शासन के अंतिम वर्षों में दरबार न्याय की जगह भय का स्थान बन गया।
लोग गायब होने लगे।
झूठी गवाहियाँ।
संपत्ति छीनना।
बिना सुनवाई दंड।
और अंततः…
एक रात पूरी हवेली में आग लगी।
राजपरिवार और दरबार के कई लोग मारे गए।
उसके बाद हवेली छोड़ दी गई।
लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार—
दरबार बंद नहीं हुआ।
बस…
उसके न्यायाधीश बदल गए।
अब वहाँ जीवित राजा नहीं बैठता।
वहाँ बैठते हैं—
मृतक।
हर अमावस्या…
किसी जीवित व्यक्ति को बुलावा जाता है।
पुराने records में पिछले 70 वर्षों में ऐसे 31 लोगों का उल्लेख है।
21 गायब हुए।
6 मृत मिले।
3 मानसिक रूप से टूटे हुए वापस आए।
और केवल एक व्यक्ति…
पूरी तरह स्वस्थ लौटकर आया।
उसने वापस आने के बाद सिर्फ़ एक वाक्य कहा—
“वहाँ मृत लोग फैसला नहीं सुनाते…
वे केवल वह सच पूछते हैं जिसे जीवित लोग दबा देते हैं।”
अगले दिन…
उसने आत्मसमर्पण कर दिया।
एक 19 वर्ष पुराने अपराध के लिए।
All Chapters
- अध्याय 1 – काला बुलावा
- अध्याय 2 – जिसका नाम पुकारा गया
- अध्याय 3 – सात साल पुराना मुकदमा
- अध्याय 4 – मृत माँ की गवाही
- अध्याय 5 – जो दरबार से लौट आया
- अध्याय 6 – अमावस्या से पहले
- अध्याय 7 – तेरह खाली कुर्सियाँ
- अध्याय 8 – मालिनी अभी जिंदा है?
- अध्याय 9 – मृतकों की सूची
- अध्याय 10 – दरबार किसका है?
- अध्याय 11 – तुम गवाह नहीं हो
- अध्याय 12 – मृतकों का दरबार
