काल्पनिक महानगर अमायरा दो दुनियाओं में बँटा है।
दिन में—
कॉर्पोरेट ऑफिस।
महँगे कैफ़े।
गैलरियाँ।
राजनीतिक परिवार।
सोशल मीडिया की चमक।
रात में—
पुरानी हवेलियाँ।
private societies।
बंद दरवाज़ों के पीछे होने वाली पार्टियाँ।
और शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों के बीच फुसफुसाकर लिया जाने वाला एक नाम—
The Nocturne Ball
कोई नहीं जानता इसे आयोजित कौन करता है।
न कोई वेबसाइट।
न सदस्यता।
न टिकट।
आप केवल तभी जा सकते हैं…
जब नक़ाब स्वयं आपके पास पहुँचे।
रिवांशी मेहरा एक सफल 32 वर्षीय portrait photographer है।
उसका काम है—
लोगों के चेहरों के पीछे छिपी भावनाओं को तस्वीरों में पकड़ना।
लेकिन विडंबना यह है…
कि स्वयं रिवांशी अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा अभिनय कर रही है।
एक प्रतिष्ठित परिवार।
सफल career।
एक स्थिर relationship।
सामाजिक सम्मान।
बाहर से सब कुछ perfect।
अंदर…
वह वर्षों से एक सवाल दबाए बैठी है—
“अगर मुझे किसी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरना होता…
तो मैं कौन होती?”
Nocturne Ball में प्रवेश करने के बाद यह सवाल खेल नहीं रहता।
अगली सुबह…
रिवांशी की कुछ photographs बदल चुकी हैं।
पुरानी तस्वीरों में…
उसके चेहरे की जगह दूसरी महिला दिखाई देती है।
उसका प्रेमी अद्वय राजदान दावा करता है कि वह उस दूसरी महिला को वर्षों से जानता है।
लेकिन रिवांशी के पास अपनी पुरानी जिंदगी के physical records मौजूद हैं।
तभी मामले में प्रवेश करते हैं behavioral investigator कबीरांश सूरी, forensic imaging specialist डॉ. अन्विता कौल और social psychologist डॉ. समायरा नाथ।
उनकी जांच एक डरावना सवाल खड़ा करती है—
क्या Nocturne Ball चेहरा बदलता है?
या…
वह केवल दुनिया को यह विश्वास दिला देता है…
कि चेहरा हमेशा से दूसरा ही था?
All Chapters
- अध्याय 1 – लाल नक़ाब
- अध्याय 2 – इच्छाओं का नृत्य
- अध्याय 3 – आधी रात का चेहरा
- अध्याय 4 – मेरी जगह कौन है?
- अध्याय 5 – सुनहरे नक़ाब वाला अजनबी
- अध्याय 6 – वह इच्छा जिसे मैंने दबाया
- अध्याय 7 – इवानिका का चेहरा
- अध्याय 8 – पिछली बार की रात
- अध्याय 9 – नक़ाब के पीछे का प्रयोग
- अध्याय 10 – असली चेहरा किसका है?
- अध्याय 11 – आख़िरी नृत्य
- अध्याय 12 – रात का नक़ाब-नृत्य
