अँधेरी सौगात

अँधेरी सौगात
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मुंबई के काल्पनिक upscale इलाके सागरिका हाइट्स में रहने वाली नायरा सहगल एक सफल luxury-brand strategist है।
स्वतंत्र।
आत्मविश्वासी।
सामाजिक रूप से प्रभावशाली।
लेकिन निजी जिंदगी में…
वह लंबे रिश्ते के टूटने के बाद…
दोबारा किसी के करीब जाने से बच रही है।
एक रात…
उसके अपार्टमेंट के बाहर…
एक खूबसूरत काली डिब्बी मिलती है।
अंदर…
वही दुर्लभ परफ्यूम होता है…
जिसकी चर्चा नायरा ने वर्षों पहले केवल अपने कॉलेज प्रेमी से की थी।
कोई नाम नहीं।
सिर्फ़ एक कार्ड—
“कुछ इच्छाएँ कभी पुरानी नहीं होतीं।”
दूसरी रात…
एक किताब आती है।
उस पन्ने पर निशान लगा है…
जहाँ उसकी पसंदीदा पंक्ति लिखी है।
तीसरी रात…
एक रेशमी दुपट्टा।
फिर एक रिकॉर्ड।
फिर एक पुरानी तस्वीर।
हर सौगात…
उसे ऐसा महसूस कराती है…
मानो कोई व्यक्ति…
उसकी सबसे निजी इच्छाएँ…
आज भी याद रखता है।
नायरा उस अनजान व्यक्ति की ओर आकर्षित होने लगती है।
लेकिन जल्द…
उसकी जिंदगी में संयोग बढ़ने लगते हैं।
जिस व्यक्ति से मिलने से उसे रोका जाता है…
उसके साथ अगले दिन कोई विवाद हो जाता है।
जिस पार्टी में जाने से मना किया जाता है…
वहाँ उसकी निजी जानकारी लीक हो जाती है।
जिस दोस्त पर शक करने को कहा जाता है…
उसके फोन से वास्तव में कुछ संदिग्ध डेटा मिलता है।
धीरे-धीरे…
नायरा को लगने लगता है—
शायद यह अजनबी…
उसे नियंत्रित नहीं…
बचा रहा है।
फिर…
एक रात…
उसे सौगात नहीं मिलती।
सिर्फ़ एक पर्ची आती है—
“आज मेरी बात नहीं मानी…
इसलिए अगली सौगात तुम्हारी नहीं होगी।”
अगली सुबह…
उसकी सबसे करीबी दोस्त इराज़ा कपूर गायब होती है।
मामले में प्रवेश करते हैं एसीपी समरित देसाई, साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. तृषा मेनन और संबंध-मनोवैज्ञानिक डॉ. अयानिका घोष।
लेकिन…
जांच का सबसे कठिन हिस्सा यह नहीं कि सौगात कौन भेजता है।
सबसे कठिन प्रश्न है—
नायरा कब से उसकी शिकार थी…
और कब…
वह स्वयं उस नियंत्रण को प्रेम समझने लगी?

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