कलयुगी बेटी

कलयुगी बेटी
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कभी-कभी इंसान अपने सपनों के पीछे इतना भागने लगता है कि वह उन रिश्तों की कीमत भूल जाता है जिन्होंने उसे उन सपनों तक पहुँचाया।
हरियाणा के एक छोटे शहर रोहतक में रहने वाली सान्वी चौहान बचपन से ही बहुत महत्वाकांक्षी थी।

उसकी माँ निर्मला चौहान ने पति के गुजर जाने के बाद अकेले मेहनत करके उसे पढ़ाया और बड़ा किया।
निर्मला का सिर्फ एक सपना था —
अपनी बेटी को सफल देखना।

सालों बाद जब सान्वी को एक बड़ी सरकारी नौकरी पाने का मौका मिलता है, तो उसकी जिंदगी बदलने लगती है।
लेकिन उसी सफलता के रास्ते में कुछ पुराने पारिवारिक विवाद, संपत्ति के झगड़े और गलत लोगों का असर उसकी सोच को बदलने लगता है।

धीरे-धीरे माँ-बेटी के रिश्ते में दूरी आने लगती है।
जिस बेटी के लिए माँ ने पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी थी, वही बेटी अब अपने सपनों और रिश्तों के बीच उलझ जाती है।
एक दिन अचानक निर्मला के साथ हुई घटना पूरे शहर को हिला देती है।

हर किसी की नजर सान्वी पर आ जाती है।
लेकिन क्या सच इतना सीधा था जितना लोगों को दिखाई दे रहा था?
या इस कहानी के पीछे छुपी थी कोई और साजिश?

यह कहानी है लालच, गलत फैसलों, माँ के प्यार और उस सच की…
जो सामने आने के बाद हर रिश्ते की परिभाषा बदल देता है।

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