मुंबई की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली Skyline One Tower में देश के सबसे बड़े उद्योगपति ध्रुव सिंघानिया की हत्या हो जाती है।
पूरी इमारत AI आधारित CCTV निगरानी में थी। एक भी ब्लाइंड स्पॉट नहीं। हर मंज़िल रिकॉर्ड हो रही थी।
पुलिस को पूरा विश्वास था कि हत्यारा कुछ ही घंटों में पकड़ा जाएगा।
लेकिन जब फुटेज देखी गई… तो सब हैरान रह गए।
ध्रुव अपने पेंटहाउस में अकेले जाते हुए दिखाई देता है। कोई अंदर नहीं जाता। कोई बाहर नहीं आता। और कुछ मिनट बाद… वह मृत पाया जाता है। कमरा अंदर से लॉक था।
मामला आत्महत्या घोषित कर दिया जाता है।
लेकिन उसी CCTV सिस्टम पर काम करने वाला डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ अद्वैत रावल फुटेज का फ्रेम-बाय-फ्रेम विश्लेषण करता है। उसे महसूस होता है कि कैमरे ने झूठ नहीं बोला… बल्कि किसी ने कैमरे को झूठ बोलने पर मजबूर किया है।
हर कैमरे का टाइम अलग-अलग कुछ मिलीसेकंड बदला गया था। कुछ फ्रेम गायब थे। कुछ फुटेज दोबारा चलाई गई थीं। और एक कैमरे में… सिर्फ एक सेकंड के लिए… एक ऐसा चेहरा दिखाई देता है… जिसे सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार तीन साल पहले मर चुका घोषित किया जा चुका था।
जैसे-जैसे अद्वैत सच के करीब पहुँचता है… उसकी टीम के लोग गायब होने लगते हैं। एक गवाह सड़क दुर्घटना में मर जाता है। दूसरा गवाह लापता हो जाता है। और जिसने CCTV सर्वर इंस्टॉल किया था… वह अपने घर में मृत मिलता है।
अब अद्वैत समझ चुका था… हत्या सिर्फ एक आदमी की नहीं हुई थी… बल्कि सच की भी हत्या की गई थी।
अब सवाल था— कैमरे के पीछे आखिर कौन था?
All Chapters
- अध्याय 1: कैमरे का झूठ
- अध्याय 2: फ्रेम-बाय-फ्रेम जांच
- अध्याय 3: टाइमलाइन की दरार
- अध्याय 4: मृत व्यक्ति की वापसी
- अध्याय 5: विक्रम भसीन का संदेह
- अध्याय 6: नील अरोड़ा की पुरानी फाइलें
- अध्याय 7: गायब गवाह और बढ़ते खतरे
- अध्याय 8: मीडिया का तूफान और कोर्ट में पहला राउंड
- अध्याय 9: AI का अंधेरा और राजनीतिक साजिश
- अध्याय 10: अंतिम सच और कैमरे का झूठ
