हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच स्थित एक प्राचीन मठ में, भिक्षु विमल की जीवन एक शांत, अनुशासित दिनचर्या में बीत रहा था। किंतु एक रात्रि, गहन ध्यान के दौरान उसे एक अस्पष्ट स्वप्न प्राप्त हुआ—एक अंधेरे पथ पर चलती हुई एक छाया, जो उसे दूर की अनजानी भूमियों की ओर बुला रही थी, और पीछे से आती हुई एक रहस्यमयी आवाज़ जो बार-बार पूछ रही थी: “क्या तुम सत्य जानने के लिए तैयार हो?”
विमल का मन अशांत हो उठा। मठ की दीवारें अब उसे बंधन प्रतीत होने लगीं। क्या यह स्वप्न मात्र भ्रम था, अथवा कोई पूर्वजन्म का संकेत? क्या यात्रा करने से वह ज्ञान प्राप्त करेगा, या फिर कोई गहरा रहस्य उसका सामना करेगा जो उसकी आस्था को ही चुनौती दे देगा?
गुरु की अनुमति प्राप्त कर, विमल ने एक झोली और दंड लेकर मठ छोड़ दिया। उसे ज्ञात नहीं था कि यह यात्रा मात्र आध्यात्मिक खोज नहीं, अपितु एक ऐसी suspenseपूर्ण सैर होगी जिसमें छिपे हुए खतरे, अप्रत्याशित भेंटें, और ऐसे रहस्य होंगे जो संसार की सीमाओं से परे थे। प्रत्येक कदम के साथ, विमल की परीक्षा बढ़ती गई—क्या वह अपनी आंतरिक शांति बनाए रख पाएगा, अथवा अंधकार उसे ग्रस लेगा?
