साल 1998…
जब मोबाइल हर हाथ में नहीं था…
और एक फोन कॉल…
पूरे दिन की सबसे बड़ी खुशी होती थी।
दिल्ली में रहने वाला आदित्य शर्मा हर रविवार शाम अपने चाचा को फोन करने के लिए पास के एसटीडी-पीसीओ पर जाता था।
लेकिन…
एक दिन…
गलती से एक गलत नंबर मिल गया।
फोन उठाने वाली लड़की ने सिर्फ़ इतना कहा—
“हेलो… शायद आपने गलत नंबर लगाया है।”
आदित्य ने माफी माँगी…
फोन कट गया…
लेकिन उसकी आवाज़…
दिल में रह गई।
कुछ दिनों बाद…
फिर वही नंबर मिल गया।
इस बार बातचीत थोड़ी लंबी हुई।
फिर…
हर रविवार…
बिना मिले…
बिना देखे…
सिर्फ़ आवाज़ के सहारे…
दो अनजान लोग…
एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए।
लेकिन…
एक दिन अचानक…
वह नंबर हमेशा के लिए बंद हो गया।
सालों बाद…
आदित्य को एक पुरानी टेलीफोन डायरी मिलती है…
जिसमें वही नंबर फिर से लिखा होता है।
क्या वह प्यार अधूरा रह गया था…
या किस्मत ने उसके लिए कोई और कहानी लिख रखी थी?
