हर सुबह…
ठीक आठ बजे…
शहर के एक पुराने बस स्टॉप पर…
दो अजनबी…
बिना कुछ कहे…
एक-दूसरे को देखते थे।
ना कोई परिचय…
ना कोई बातचीत…
सिर्फ़ एक हल्की-सी मुस्कान…
जो हर दिन…
थोड़ी और अपनी लगने लगी।
अर्णव राजदान…
एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का…
जो अपनी पहली कॉर्पोरेट नौकरी के लिए रोज़ उसी बस का इंतज़ार करता था।
और…
मायरा आहूजा…
जो शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में नई-नई शिक्षिका बनी थी।
बारिश हो…
धूप हो…
या सर्द सुबह…
दोनों रोज़ उसी बस स्टॉप पर मिलते…
लेकिन कभी बात नहीं करते।
एक दिन…
बस नहीं आई।
और…
उसी दिन…
दो अजनबियों की कहानी…
एक खूबसूरत सफर में बदल गई।
लेकिन…
ज़िंदगी…
हर प्रेम कहानी की परीक्षा लेती है।
क्या उनकी मोहब्बत…
रोज़ मिलने की आदत से आगे बढ़ पाएगी…
या…
एक गलतफ़हमी…
सब कुछ बदल देगी?
