अर्जुन सिंघल…
शहर का सबसे सफल उद्योगपति।
पैसा…
नाम…
शोहरत…
सब कुछ उसके पास था।
रिश्तेदार…
दोस्त…
और समाज…
हर कोई उसके आसपास मंडराता था।
लेकिन…
एक रात…
उसकी कंपनी पर करोड़ों का घोटाला सामने आया।
बैंक अकाउंट सील हो गए।
घर नीलाम हो गया।
जो लोग…
कल तक उसके साथ तस्वीरें खिंचवाते थे…
आज…
फोन उठाना भी बंद कर चुके थे।
उसी मुश्किल वक्त में…
एक ऐसा इंसान…
उसके दरवाज़े पर आया…
जिसे अर्जुन ने…
सालों पहले…
अपनी ज़िंदगी से निकाल दिया था।
अब…
वक्त करवट ले चुका था।
और…
अर्जुन को समझ आने वाला था…
कि दौलत से नहीं…
रिश्तों से इंसान अमीर बनता है।
