हर सुबह…
अद्वैत शर्मा…
समय पर ऑफिस जाता था।
सबको मुस्कुराकर मिलता था।
हर किसी की मदद करता था।
लोग कहते थे…
“इससे खुश इंसान हमने कभी नहीं देखा।”
लेकिन…
हर रात…
जब कमरे की बत्तियाँ बुझ जातीं…
तो…
उसी इंसान की आँखों से…
नींद नहीं…
आँसू बहते थे।
एक बंद दराज़ में…
वर्षों से…
एक पुरानी डायरी…
एक टूटी हुई घड़ी…
और…
एक अधूरी तस्वीर रखी थी।
वह किसी को…
उन चीज़ों को छूने भी नहीं देता था।
क्योंकि…
उनमें कैद था…
उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच।
एक ऐसा सच…
जिसकी आवाज़…
सिर्फ़ उसे सुनाई देती थी।
लेकिन…
जब अतीत का एक व्यक्ति…
अचानक उसके सामने लौट आया…
तो…
सालों से दबा हुआ शोर…
अब…
खामोश नहीं रह सका।
