बचपन से…
हर रात…
विवान चौधरी…
एक ही सपना देखता था।
एक पुराना रेलवे स्टेशन…
बारिश…
लाल छाता लिए…
एक छोटी बच्ची…
और…
दूर खड़ा…
एक सफेद कोट पहने आदमी।
हर बार…
सपना वहीं खत्म हो जाता।
सालों तक…
विवान ने इसे…
सिर्फ़ एक अजीब सपना समझा।
लेकिन…
एक दिन…
उसे काम के सिलसिले में…
उसी शहर जाना पड़ा…
जहाँ…
वह रेलवे स्टेशन…
सचमुच मौजूद था।
सब कुछ…
वैसा ही था…
जैसा वह वर्षों से सपनों में देखता आया था।
अब…
हर रात का सपना…
हकीकत बन रहा था।
और…
उस सपने के पीछे…
छिपा था…
तीस साल पुराना ऐसा राज़…
जिसे किसी ने…
हमेशा के लिए दफना दिया था।
