सन्नाटे का पीछा

सन्नाटे का पीछा
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लखनऊ के शांत और पुराने इलाके में स्थित कश्यप सदन बाहर से एक आदर्श परिवार का घर दिखाई देता था।
उस घर का छोटा बेटा अनिरुद्ध कश्यप एक निजी बैंक में काम करता था और रोज रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे घर लौटता था।
कुछ दिनों से उसे महसूस हो रहा था कि रेलवे कॉलोनी से घर तक आने वाली सुनसान सड़क पर कोई उसका पीछा करता है।
पीछे आने वाला व्यक्ति कभी बोलता नहीं था।
उसके कदमों की आवाज़ भी सुनाई नहीं देती थी।
लेकिन अनिरुद्ध जब चलता…
तो बिजली के खंभों के नीचे एक लंबी परछाई कुछ दूरी तक उसके साथ चलती दिखाई देती।
वह रुकता…
तो परछाई भी रुक जाती।
वह पीछे मुड़ता…
तो सड़क खाली मिलती।

परिवार ने इसे तनाव और थकान का परिणाम समझा।
अनिरुद्ध ने सच्चाई जानने के लिए पास की दुकानों, घरों और ट्रैफिक कैमरों की रिकॉर्डिंग इकट्ठी की।
फुटेज में काले कपड़े पहने एक व्यक्ति उसके पीछे चलता दिखाई दिया।
आखिरी कैमरे में उसका चेहरा कुछ क्षणों के लिए साफ हुआ।
वह चेहरा…
अनिरुद्ध की बड़ी बहन अदिति कश्यप का था।
लेकिन रिकॉर्डिंग के उसी समय…
घर के अंदर लगे कैमरे में अदिति अपनी माँ के साथ भोजन करती दिखाई दे रही थी।

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