दिल्ली के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता अद्वैत कपूर ने अपने करियर में सैकड़ों बड़े अपराधियों को अदालत से बरी कराया था।
कानून की नज़र में…
वह हमेशा सही था।
लेकिन…
हर मुकदमे के बाद…
कुछ परिवार हमेशा के लिए बर्बाद हो जाते थे।
बीस साल बाद…
एक अनजान व्यक्ति ने उन सभी मामलों की फाइलें फिर से खोलनी शुरू कर दीं।
हर नए खुलासे से पहले…
अद्वैत को एक नया लिफाफा मिलता—
“कर्म की अदालत में अगली तारीख तय हो चुकी है।”
क्या…
यह बदले की साजिश थी?
या…
वर्षों पहले दबा दिया गया न्याय…
अब वापस लौट रहा था?
