देवगढ़ शहर के बाहरी इलाके में स्थित शिवा टेक्सटाइल मिल पिछले पंद्रह वर्षों से बंद पड़ी थी।
फैक्ट्री के पास रहने वाले लोग दावा करते थे कि आधी रात के बाद वहाँ से किसी के चीखने, मदद माँगने और भागने की आवाज़ें आती हैं।
कई बार पुलिस आई…
कुछ नहीं मिला।
धीरे-धीरे फैक्ट्री “भूतिया” घोषित कर दी गई।
लेकिन…
एक रात…
उसी फैक्ट्री के अंदर एक कॉलेज छात्र मृत मिला।
उसके मोबाइल में सिर्फ़ एक ऑडियो रिकॉर्डिंग थी।
रिकॉर्डिंग में…
पहले सन्नाटा…
फिर किसी महिला की चीख…
और आखिर में सिर्फ़ चार शब्द—
“उन्होंने उसे मार दिया…”
मामला एसीपी आरव प्रताप सिंह को सौंपा गया।
उनके साथ थीं देश की प्रसिद्ध फॉरेंसिक ऑडियो विशेषज्ञ डॉ. श्रेया व्यास।
जब रिकॉर्डिंग को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया गया…
तो हर गूँज…
हर प्रतिध्वनि…
हर टूटी हुई आवाज़…
एक नए सुराग में बदलने लगी।
आरव को जल्द ही समझ आ गया…
कि फैक्ट्री में सुनाई देने वाली आवाज़ें डराने के लिए नहीं थीं…
वे वर्षों पुराने हत्या के मामले की आख़िरी गवाह थीं।
All Chapters
- अध्याय 1 – पहली गूँज
- अध्याय 2 – बंद फैक्ट्री
- अध्याय 3 – मौत की रिकॉर्डिंग
- अध्याय 4 – भूला हुआ नाम
- अध्याय 5 – पंद्रह साल पुराना सच
- अध्याय 6 – झूठा गवाह
- अध्याय 7 – आवाज़ों की भाषा
- अध्याय 8 – छिपा हुआ सबूत
- अध्याय 9 – गवाही देने वाली गूँज
- अध्याय 10 – असली मास्टरमाइंड
- अध्याय 11 – आख़िरी रिकॉर्डिंग
- अध्याय 12 – गूंज का सच
